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Showing posts from March 5, 2017

मेहनती छात्र

पढ़ाई पूरी करने के बाद एक छात्र किसी बड़ी कंपनी में नौकरी पाने की चाह में इंटरव्यू देने के लिए पहुंचा....

छात्र ने बड़ी आसानी से पहला इंटरव्यू पास कर लिया...

अब फाइनल इंटरव्यू
कंपनी के डायरेक्टर को लेना था...

और डायरेक्टर को ही तय
करना था कि उस छात्र को नौकरी पर रखा जाए या नहीं...

डायरेक्टर ने छात्र का सीवी (curricular vitae) देखा और पाया कि पढ़ाई के साथ- साथ यह छात्र ईसी (extra curricular activities) में भी हमेशा अव्वल रहा...

डायरेक्टर- "क्या तुम्हें पढ़ाई के दौरान
कभी छात्रवृत्ति (scholarship) मिली...?"

छात्र- "जी नहीं..."

डायरेक्टर- "इसका मतलब स्कूल-कॉलेज की फीस तुम्हारे पिता अदा करते थे.."

छात्र- "जी हाँ , श्रीमान ।"

डायरेक्टर- "तुम्हारे पिताजी क्या काम करते है?"

छात्र- "जी वो लोगों के कपड़े धोते हैं..."

यह सुनकर कंपनी के डायरेक्टर ने कहा- "ज़रा अपने हाथ तो दिखाना..."

छात्र के हाथ रेशम की तरह मुलायम और नाज़ुक थे...

डायरेक्टर- "क्या तुमने कभी कपड़े धोने में अपने पिताजी की मदद की...?"

छात्र-…

संत स्वामी रामकृष्ण परमहंस

कहा जाता है कि संत स्वामी रामकृष्ण परमहंस को काली माता के दर्शन ब्रह्मांड की माता के रूप में हुए थे। उनके माता पिता को उनके जन्म से पहले ही आलौकिक घटनाओं का अनुभव हुआ था। संन्यास ग्रहण करने के बाद उनका नाम श्रीरामकृष्ण परमहंस हुआ। स्वामी विवेकानंद उनके परम शिष्य थे।   संत रामकृष्ण परमहंस को आध्यात्म पर चर्चा करना बहुत पसंद था। एक बार वह नागागुरु तोतापुरी के साथ बैठे थे। धूनी जल रही थी और ज्ञान पर चर्चा हो रही थी। तभी एक माली वहां से गुजरा और उसने धूनी से अपनी चिलम में भरने के लिए कुछ कोयले ले लिए। तोतापुरी जी को माली का इस तरह पवित्र धूनी छूना बुरा लगा। उन्होंने उसे अपशब्द कह दिए। माली हमेशा स्वामी जी की धूनी से कोयले लेकर चिलम भरा करता था। इस घटना पर स्वामी जी जोर-जोर से हंसने लगे। नागा गुरु ने कहा कि माली ने पवित्र अग्नि को छूकर अपवित्र कर दिया। इस पर परमहंस ने कहा कि मुझे नहीं पता था कि किसी के छूने भर से कोई वस्तु अपवित्र हो जाती है। यह सुनकर नागा गुरु ने माली से क्षमा मांगी। रामकृष्ण परमहंस को दक्षिणेश्वर में पुजारी की नौकरी मिली। 15 दिन बाद ही मंदिर कमेटी के सामने उनकी पेशी हो …

महिलाओं का आविष्कार

हमारी सभ्यता और संस्कृति में महिलाओं का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। महिलाओं ने समाज और सभ्यता को हमेशा नई दिशा दी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आइए जानते हैं ऐसी महिलाओं के बारे में जिन्होंने हमें एक से बढ़कर एक आविष्कार दिए। इनका हम आज भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में खूब इस्तेमाल करते हैं। स्टेफनी कोलेक ने बुलेट प्रूफ जैकेट और ऑप्टिक केबल बनाने वाले पदार्थ की खोज की। यह स्टील से पांच गुना ज्यादा मजबूत होता है। हेडी लमर ने गुप्त संचार सिस्टम बनाया। इस आविष्कार का नया रूप वाई-फाई है। एलिस पार्कर ने सेंट्रल हीटिंग सिस्टम का आविष्कार किया तो मारग्रेट बिलकॉक्स ने 1893 में कार हीटर का डिजाइन तैयार किया। इतिहासकार मानते हैं कि बीयर की खोज एक मेसोपोटामियन महिला द्वारा की गई थी। वहीं, मारग्रेट नाइटबुड ने 1868 में ऐसी मशीन बनाई, जो पेपर को मोड़कर पेपर बैग बना सकती थी। नैंसी जॉनसन नामक महिला ने आइसक्रीम फ्रीजर की खोज की। रूथ बेकफील्ड ने कुकीज का आविष्कार किया। जोसेफिन कोकरेन ने 1886 डिशवाशर बनाया।

भीष्म

पितामह भीष्म के जीवन का एक ही पाप था कि उन्होंने समय पर क्रोध नहीं किया
             और
जटायु के जीवन का एक ही पुण्य था कि उसने समय पर क्रोध किया.⚜

"परिणामस्वरुप एक को बाणों की शैय्या मिली और एक को श्री राम की गोद."

          वेद कहताहै-- "क्रोध भी तब पुण्य बन जाता है जब वह धर्म और मर्यादा के लिए किया जाए और सहनशीलता भी तब पाप बन जाती है जब वह धर्म और मर्यादा को बचा ना पाये"

आज हम आपको महाभारत से जुडी एक घटना बताते है जिसमे पांचो पांडवों ने अपने मृत पिता पाण्डु का मांस खाया था उन्होंने ऐसा क्यों किया यह जानने के लिए पहले हमे पांडवो के जनम के बारे में जानना पड़ेगा। पाण्डु के पांच पुत्र युधिष्ठर] भीम] अर्जुन] नकुल और सहदेव थे। इनमे से युधिष्ठर] भीम और अर्जुन की माता कुंती तथा नकुल और सहदेव की माता माद्री थी। पाण्डु इन पाँचों पुत्रों के पिता तो थे पर इनका जनम पाण्डु के वीर्य तथा सम्भोग से नहीं हुआ था क्योंकि पाण्डु को श्राप था की जैसे ही वो सम्भोग करेगा उसकी मृत्यु हो जाएगी ¼सम्पूर्ण कहानी आप यहाँ पढ़ सकते है & 16 पौराणिक कथाएं & पिता के वीर्य और माता के गर्…