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Showing posts from January 4, 2017

बाहशाह सलामत और पादरी

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सिंधु नदी के किनारे बादशाह सलामत का खेमा लगा था। रात का वक्त था और शाही लश्कर के बीचोबीच आकाश दीया चमक रहा था। बादशाह सलामत अपनी दोआशियाना मंजिल मे पादरी मोन्सेराते के साथ बैठे ये देख रहे थे कि नक्शे पर पुर्तगाल उनकी सल्तनत से कितना दूर है। एकाएक बादशाह ने सर उठा कर पादरी मोन्सेराते से पूछा, "पादरी शादी क्यों नहीं करते ? क्या ये खुदा का हुक्म नहीं है कि सभी मर्दों की बीवियां होनी चाहिए ? ऐसा लगता है आप या तो शादी के खिलाफ है या अपनी ही बात को झूठलाते हैं....शादी नहीं करना भी अच्छा है और करना भी अच्छा है।" पादरी ने जवाब दिया,"हजरत बादशाह नही जानते कि दो अच्छे बातों मे से एक अक्सर ज्यादा बेहतर होती है ? जैसे चांदी अच्छा है, लेकिन सोना और ज्यादा अच्छा। अक्ल सोने से बेहतर है और चरित्र सबसे बेहतर। चाँद खूबसूरत है, लेकिन सूरज और भी ज्यादा।"  बाहशाह सलामत सहमत हुए तो पादरी  मोन्सेराते ने कहा, "पादरी शादी नही करते ताकि वो इससे बेहतर कर सकें। ईसा मसीह जैसा बनें। बिना किसी ख्वाहिश के ऊपर उठकर जिएं। छठे खुदाई हुक्म के मुताबिक ईसाईयों को बल्कि पूरी इंसानियत को ऐशो-आराम म…

यात्रा जिंदगी की

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एक युवा लड़की अपने प्रेमी को बहुत प्यार करती थी। वह नौकरी के काम से किसी दूसरे शहर में रह रहा था ।काफी समय हो गया था, इसलिए उसे बहुत याद करती थी। एक बुजुर्ग थे, जिन्हें वह बहुत मानती थी। उनके पास अक्सर जाया करती थी। उनकी हर बात मानती थी। अबकी बार उसे उनसे मिले काफी समय हो गया था। आखिरकार एक दिन वह उनसे मिलने पहुँची। बुजुर्ग ने महिला का स्वागत किया और उसके हाथ में ताजे अंगूर टोकरी पकड़ायी और कहा, "क्या तुम उस पहाड़ को देख रही हो ?" महिला ने कहा, "हां।" बुजुर्ग ने कहा, "इस टोकरी को उस पर्वत के ऊपर लेकर जाओ ।"  महिला कुछ नहीं पुछा। हालाँकि वो यह करने की इच्छुक नहीं थी। नाखुश मन से  उसने टोकरी लेकर पर्वत कि दिशा कि कदम बढ़ाने लगी। जैसे-जैसे चढ़ाई आ रही थी, चढ़ना मुश्किल हो रहा था।वह मन  ही मन बोल रही थी कि बुजुर्ग ने उसे किस काम पर लगा दिया है, उसे यह काम क्यों करना पड़ रहा है ? इस काम का क्या मतलब है? व्यर्थ ही यहाँ आई । सूरज का तेज धूप उसे झुलसा रही थी। अंगूर के गुच्छों का वजन अब असहनीय हो रहा था। कुछ भी उसे ऊपर चढ़ने मे प्रेरित नहीं कर रहा था। आखिरकार वह पर…