वायुयान (Aircraft)

सा यान जो हवा में उड़ सकता है।
एक बोईंग 787 ड्रीमलाइनर विमान हवा में उड़ान भरता हुआ
वायुयान ऐसे यान को कहते है जो धरती के वातावरण या किसी अन्य वातावरण में उड सकता है। किन्तु राकेट, वायुयान नहीं है क्योंकि उडने के लिये इसके चारो तरफ हवा का होना आवश्यक नहीं है।
इतिहास
संग्रहालय में रखे पुराने विमान (नेशनल म्युजियम ऑफ एयर ऐण्ड स्पेस, वाशिंगटन डीसी)
आधुनिक वायुयान को सबसे पहले राइट बंधुओं ने बनाया था। विल्वर और ओरविल में केवल चार साल का अंतर था। जिस समय उन्हें हवाई जहाज बनाने का ख्याल आया, उस समय विल्वर सिर्फ 11 साल का था और ओरविल की उम्र थी 7 साल। हुआ यूं कि एक दिन उनके पिता उन दोनों के लिए एक उड़ने वाला खिलौना लाए। यह खिलौना बांस, कार्क, कागज और रबर के छल्लों का बना था। इस खिलौने को उड़ता देख विल्वर और ओरविल के मन में भी आकाश में उड़ने का विचार आया। उन्होंने निश्चय किया कि वे भी एक ऐसा खिलौना बनाएंगे।
इसके बाद वे दोनों एक के बाद एक कई मॉडल बनाने में जुट गए। अंतत: उन्होंने जो मॉडल बनाया, उसका आकार एक बड़ी पतंग सा था। इसमें ऊपर तख्ते लगे हुए थे और उन्हीं के सामने छोटे-छोटे दो पंखे भी लगे थे, जिन्हें तार से झुकाकर अपनी मर्जी से ऊपर या नीचे ले जाया जा सकता था। बाद में इसी यान में एक सीधी खड़ी पतवार भी लगायी गयी। इसके बाद राइट भाइयों ने अपने विमान के लिए 12 हॉर्सपावर का एक deasel इंजन बनाया और इसे वायुयान की निचली लाइन के दाहिने और निचले पंख पर फिट किया और बाईं ओर पायलट के बैठने की सीट बनाई।
राइट बंधुओं के प्रयोग काफी लंबे समय तक चले। तब तक वे काफी बड़े हो गये थे और अपने विमानों की तरह उनमें भी परिपक्वता आ गयी थी। आखिर में 1903 में 17 दिसम्बर को उन्होंने अपने वायुयान का परीक्षण किया। पहली उड़ान ओरविल ने की। उसने अपना वायुयान 36 मीटर की ऊंचाई तक उड़ाया। इसी यान से दूसरी उड़ान विल्वर ने की। उसने हवा में लगभग 200 फुट की दूरी तय की। तीसरी उड़ान फिर ओरविल ने और चौथी और अन्तिम उड़ान फिर विल्वर ने की। उसने 850 फुट की दूरी लगभग 1 मिनट में तय की। यह इंजन वाले जहाज की पहली उड़ान थी। उसके बाद नये-नये किस्म के वायुयान बनने लगे। पर सबके उड़ने का सिद्धांत एक ही है।
वायुयान के विभिन्न प्रकार
Airfoil having extended by a few degrees flaps
मुख्य रूप से वायुयानों को दो वर्गों में बांटा जा सकता है:
  • हवा से हल्के (एरोस्टैट्स)
  • हवा से भारी (एरोडाइन्स)
एरोस्टैट्स
एरोस्टैट्स, हवा में उडने के लिये उत्प्लावन बल (bouancy) का सहारा लेते हैं। (ठीक उसी तरह जैसे पानी में लोहे का बना जलयान (शिप) तैरता है)
एरोडाइन्स
हवा से भारी वायुयान, किसी ऐसी युक्ति का प्रयोग करते हैं जिससे हवा या गैस को नीचे की तरफ दबाकर वे अपने भार के बावजूद हवा में तैरते रह सकते हैं।
एरोडाइन्स के भी अनेक प्रकार होते हैं:
एरोप्लेन (विमान)
तकनीकी रूप से इन्हें fixed-wing aircraft कहा जाता है।
रोटोक्राफ्ट
रोटोक्राफ्ट या रोटोरक्राफ्ट में घूर्णन करने वाले पंखे (रोटर) लगे होते हैं। इन पंखों के ब्लेड एरोफ्वायल सेक्शन वाले होते हैं। हेलिकाप्टरआटोगाइरो आदि इसके उदाहरण हैं। it flying with deasel engine
वायुयान का घूर्णन मुख्यतः तीन अक्षों के परितः हो सकता है, जिन्हें रोल, पिच तथा 'या' कहते हैं।
रोल (Roll).
पिच (Pitch).
या (Yaw).
उपयोग के आधार पर वायुयानों का वर्गीकरण
  • सैन्य वायुयान
  • नागरिक वायुयान

दहेज प्रथा

दहेज प्रथा

दहेज का अर्थ है जो सम्पत्ति, विवाह के समय वधू के परिवार की तरफ़ से वर को दी जाती है। दहेज को उर्दू में जहेज़ कहते हैं। यूरोप, भारत, अफ्रीका और दुनिया के अन्य भागों में दहेज प्रथा का लंबा इतिहास है। भारत में इसे दहेज, हुँडा या वर-दक्षिणा के नाम से भी जाना जाता है तथा वधू के परिवार द्वारा नक़द या वस्तुओं के रूप में यह वर के परिवार को वधू के साथ दिया जाता है। आज के आधुनिक समय में भी दहेज़ प्रथा नाम की बुराई हर जगह फैली हुई हँ। पिछड़े भारतीय समाज में दहेज़ प्रथा अभी भी विकराल रूप में है।

☆दहेज हत्याएँ☆

देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है और वर्ष 2007 से 2011 के बीच इस प्रकार के मामलों में काफी वृद्धि देखी गई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि विभिन्न राज्यों से वर्ष 2012 में दहेज हत्या के 8,233 मामले सामने आए। आंकड़ों का औसत बताता है कि प्रत्येक घंटे में एक महिला दहेज की बलि चढ़ रही है।

दहेज के विरुद्ध कानून

  • दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के अनुसार दहेज लेने, देने या इसके लेन-देन में सहयोग करने पर 5 वर्ष की कैद और 15,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।
  • दहेज के लिए उत्पीड़न करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए जो कि पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा सम्पत्ति अथवा कीमती वस्तुओं के लिए अवैधानिक मांग के मामले से संबंधित है, के अन्तर्गत 3 साल की कैद और जुर्माना हो सकता है।
  • धारा 406 के अन्तर्गत लड़की के पति और ससुराल वालों के लिए 3 साल की कैद अथवा जुर्माना या दोनों, यदि वे लड़की के स्त्रीधन को उसे सौंपने से मना करते हैं।
  • यदि किसी लड़की की विवाह के सात साल के भीतर असामान्य परिस्थितियों में मौत होती है और यह साबित कर दिया जाता है कि मौत से पहले उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी के अन्तर्गत लड़की के पति और रिश्तेदारों को कम से कम सात वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।

गुरु

मैने एक बार अपने गुरु जी से पूछा कि गुरु का सही अर्थ क्या है। उन्होंने एक सेब मेरे हाथ में देकर मुझसे पूछा इसमें कितने बीज हैं बता सकते हो? सेब काटकर मैंने गिनकर कहा तीन बीज हैं। उन्होंने एक बीज अपने हाथ में लिया और फिर पूछा, इस बीज में कितने सेब हैं यह भी सोचकर बताओ?
मैं सोचने लगा एक बीज से एक पेड़, एक पेड़ से अनेक सेब, अनेक सेबों में फिर तीन-तीन बीज हर बीज से फिर एक एक पेड़ और यह अनवरत क्रम। वो मुस्कुराते हुए बोले, बस इसी तरह परमात्मा की कृपा हमें प्राप्त होती रहती है।हमें उसकी भक्ति का एक बीज अपने मन में लगा लेने की ज़रूरत है। 
गुरु एक तेज है, जिनके आते ही, सारे संशय के अंधकार खत्म हो जाते हैं।
गुरु वो मृदंग है, जिसके बजते ही अनाहद नाद सुनने शुरू हो जाते है।
गुरु वो ज्ञान है, जिसके मिलते ही पांचों शरीर एक हो जाते हैं।
गुरु वो दीक्षा है, जो सही मायने में मिलती है तो भवसागर पार हो जाते है।
गुरु वो नदी है, जो निरंतर हमारे प्राण से बहती है।
गुरु वो सत चित आनंद है, जो हमें हमारी पहचान देता है।
गुरु वो बांसुरी है, जिसके बजते ही अंग-अंग थिरकने लगता है।
गुरु वो अमृत है, जिसे पीकर कोई कभी प्यासा नही रहता है!
गुरु वो समाधि है, जो चिरकाल तक रहती हैं।
गुरु वो प्रसाद है, जिसके भाग्य में हो उसे कभी कुछ भी मांगने की ज़रूरत नही पड़ती।